Published:
12 Sep 2026, 02:26 PM
Category:
राज्य
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By: Himalaya Ratan
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद अपने कार्यकाल में हुई नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रियाओं का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने अपने पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र का राजनीतिक हथकंडा बताया है।
रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ हुई है, तो उन्हें शर्म आएगी, हालांकि उन्हें इस आरोप पर विश्वास नहीं है। उन्होंने चंदन सिंह जीना को एक विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताया और सहयोगी द्वारा किसी भी गलत काम के आरोपों से इनकार किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव तब होते हैं जब सीबीआई उनके दरवाजे पर आती है। इस बार उनके सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक कहानी गढ़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में यदि उनके किसी कार्य से पार्टी का संघर्ष कमजोर होता है, तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे, इसलिए उन्होंने यह बड़ा निर्णय लिया है।
उन्होंने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) के गठन का भी बचाव किया, जिसे राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया था। रावत ने बताया कि उनके छोटे कार्यकाल के दौरान 42,000 से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां की गईं। उन्होंने यूकेएसएसएससी अध्यक्ष की नियुक्ति का भी बचाव किया, यह कहते हुए कि उनकी नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी और पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने भी इस संबंध में सलाह दी थी।
रावत ने यह भी दोहराया कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में अनियमितताएं आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से छेड़छाड़ से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रहे हैं और राहुल गांधी भी छात्रों की 'गूंज' कार्यक्रम से शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
