गढ़-कुमाऊँ की लोकसंस्कृति की झलक: कुठालगेट पर पर्यटक और यात्री राज्य की संस्कृति और लोकपरंपरा से हो रहे परिचित

Published: 11 Dec 2025, 09:43 AM   |   Updated: 11 Dec 2025, 09:42 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

मा० मुख्यमंत्री की प्रेरणा और मार्गदर्शन में देहरादून के प्रमुख चौराहे अब सिर्फ यातायात बिंदु नहीं, बल्कि सुरक्षित, भव्य और सांस्कृतिक शो-केस के रूप में तैयार किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में जिला प्रशासन ने यह परियोजना पूरी की, जबकि स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इसके लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया।

कुठालगेट पर 1.35 करोड़ रुपये और साई मंदिर तिराहे पर 85 लाख रुपये की लागत से सड़क और सौंदर्यीकरण कार्य पूरे किए गए। छह महीने के भीतर 10 मीटर चौड़ी स्लिप रोड, राउंडअबाउट, आधुनिक लाइटिंग, पहाड़ी शैली का सौंदर्यीकरण और ट्रैफिक सेफ्टी डिज़ाइन के साथ राज्य की संस्कृति और आंदोलन की झलक प्रस्तुत करने वाली कलाकृतियाँ भी स्थापित की गई हैं।

इस पहल से न केवल यातायात सुगमता और सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पर्यटक और शहरवासी गढ़वाल-कुमाऊँ की पारंपरिक स्थापत्य शैली, राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति चिन्ह और धार्मिक-सांस्कृतिक कलाकृतियों के माध्यम से राज्य की संस्कृति से रू-ब-रू हो सकेंगे।

जिला प्रशासन का कहना है, “यह अभिनव पहल देहरादून को एक लिविंग कल्चरल कॉरिडोर में बदल रही है। आने वाले पर्यटक इन चौराहों पर उत्तराखंड की संस्कृति, इतिहास और संघर्ष का अनुभव कर सकेंगे।”

चार प्रमुख चौराहों का रूपांतरण
प्रथम चरण में चार प्रमुख चौराहों को चौड़ा कर राउंडअबाउट आधारित आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम तैयार किया गया है। कुठालगेट और साई मंदिर के बाद दिलाराम चौक का आधुनिकीकरण भी लगभग पूरा हो चुका है।

इस योजना से दून के चौराहों कासौंदर्यीकरण, पारंपरिक शैली का संरक्षण, सुरक्षित ट्रैफिक संचालन और पर्यटक-अनुकूल वातावरणसुनिश्चित हुआ है। यह पहल राजधानी देहरादून को सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहरों से सुसज्जित आधुनिक शहर के रूप में उभरने में मदद करेगी।

×