"मुख्य सचिव की अध्यक्षता में रोप-वे विकास समिति की महत्वपूर्ण बैठक, बड़े प्रोजेक्ट्स पर हुई समीक्षा"

Published: 12 Dec 2025, 11:19 AM   |   Updated: 12 Dec 2025, 11:18 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश में रोप-वे विकास के लिए गठित संचालन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्यभर में रोप-वे निर्माण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि रोप-वे विकास समिति की प्रथम बोर्ड बैठक इस माह के अंत तक हर हाल में आयोजित कर ली जाए। उन्होंने बताया कि सचिव पर्यटन समिति के सदस्य सचिव होंगे। साथ ही, एनएचएलएमएल को एक सप्ताह के भीतर एसपीवी का सीईओ नियुक्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि दिसंबर के अंत तक बोर्ड बैठक पूरी की जा सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी प्रस्तावित रोप-वे प्रोजेक्ट्स को संचालन समिति से अनिवार्य स्वीकृति लेनी होगी, ताकि विभिन्न एजेंसियों द्वारा तैयार प्रोजेक्ट्स में डुप्लीकेसी रोकी जा सके। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अगले 5–10 वर्षों में संभावित पर्यटक स्थलों और आवश्यक मार्ग-विस्तारीकरण के लिए रोडमैप अभी से तैयार किया जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश सरकार द्वारा 50 रोप-वे प्रस्ताव दिए गए हैं, जिनमें से 6 प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता में रखा गया है।

  • सोनप्रयाग–केदारनाथ और गोविन्दघाट–हेमकुण्ट साहिब रोप-वे का कार्य आबंटित किया जा चुका है।

  • काठगोदाम–हनुमानगढ़ी मंदिर (नैनीताल) का प्रोजेक्ट अनुमोदन के चरण में है।

  • कनकचौरी–कार्तिक स्वामी रोप-वे की डीपीआर तैयार हो रही है।

  • रैथल बारसू–बरनाला (उत्तरकाशी) तथा जोशीमठ–औली–गौरसों प्रोजेक्ट्स की डीपीआर के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है।

मुख्य सचिव ने कहा कि आरंभिक चरण में इन 6 प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर ही फोकस किया जाए। उन्होंने सोनप्रयाग–केदारनाथ एवं गोविन्दघाट–हेमकुण्ट साहिब रोप-वे की स्टेज-वार टाइमलाइन और PERT चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही, वन और वन्यजीव स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि रोप-वे निर्माण में हैवी मशीनरी को निर्माण स्थल तक पहुँचाना चुनौतीपूर्ण होगा। इसलिए सड़कों के टर्निंग रेडियस बढ़ाने और पुलों को मजबूत करने की तैयारी अभी से शुरू की जाए।
मुख्य सचिव ने काठगोदाम–हनुमानगढ़ी प्रोजेक्ट में कैंचीधाम को भी शामिल करने और बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए वहां रोप-वे की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव अभिषेक रूहेला, तथा एनएचएलएमएल से प्रशांत जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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