Published:
10 Feb 2026, 07:59 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
देहरादून। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं की लगातार बढ़ती संख्या और तकनीकी रूप से दोषपूर्ण वाहनों के खतरों को देखते हुए राज्य परिवहन विभाग ने हर जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) स्थापित करने का बड़ा कदम उठाया है। यह योजना केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत और पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में लागू की जाएगी, जिससे तकनीकी दक्षता और सरकारी निगरानी का संतुलन बना रहे।
क्या होगा एटीएस में
इन केंद्रों पर ब्रेक सिस्टम, सस्पेंशन, स्टेयरिंग, एक्सल अलाइनमेंट, हेडलाइट्स की रोशनी, टायर की स्थिति और प्रदूषण स्तर जैसी सभी तकनीकी जांच वैज्ञानिक तरीके से होगी। इसके आधार पर वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिससे सड़क पर केवल सुरक्षित और योग्य वाहन ही चल सकेंगे।
वर्तमान और प्रस्तावित केंद्र
उत्तराखंड में फिलहाल सात एटीएस संचालित हैं—विकासनगर, डेईवाला, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी और टनकपुर। वहीं, कोटद्वार, ऋषिकेश, अल्मोड़ा, पौड़ी, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में नए केंद्र स्थापित करने की योजना है।
पर्वतीय इलाकों पर विशेष ध्यान
विभाग अब प्रमुख पर्वतीय जिलों में भी इन केंद्रों को खोलने की तैयारी में है। इसके लिए निजी क्षेत्र के सहयोग से आधुनिक मशीनरी और तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा।
विभाग का संदेश
अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह ने कहा,
“हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की सड़कों पर केवल सुरक्षित वाहन ही चलें। हर जिले में एटीएस खोलकर वाहन फिटनेस जांच को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाया जाएगा। यह सड़क सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
यह कदम राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने, वाहनों की तकनीकी क्षमता सुनिश्चित करने और पर्यटकों तथा स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में अहम साबित होगा।
