उत्तराखंड: मदरसों के हजारों छात्रों को मिलेगी मुख्यधारा की शिक्षा, अब सरकारी नौकरी के लिए मान्य होंगे प्रमाण पत्र

Published: 06 Feb 2026, 06:26 AM   |   Updated: 06 Feb 2026, 06:28 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

उत्तराखंड में मदरसों से शिक्षा ग्रहण करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के लिए राहत भरी खबर है। अब तक मदरसों से पढ़ाई करने के बावजूद उनके शैक्षिक प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं होते थे, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटका रहता था। लेकिन अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद प्रदेश के 452 मदरसों के हजारों बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।

इन मदरसों में उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। इससे हर साल मदरसों से पढ़कर निकलने वाले छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्र न सिर्फ मान्य होंगे, बल्कि वे सरकारी नौकरियों में आवेदन भी कर सकेंगे।

प्रदेश में संचालित मदरसों से अब तक 43,186 से अधिक छात्र विभिन्न वर्षों में मुंशी, मौलवी, आलिम अरबी-फारसी, कामिल और फाजिल की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। मुंशी, मौलवी और आलिम की डिग्रियों को उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं के समकक्ष मान्यता नहीं मिलने के कारण ये छात्र सरकारी नौकरियों से वंचित रह जाते थे।

हालांकि वर्ष 2016 में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया था और इसे उत्तराखंड बोर्ड के समकक्ष मान्यता दिलाने के प्रयास लगातार किए जा रहे थे। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी के अनुसार, बोर्ड से संबद्धता न होने के कारण छात्र अपने शैक्षिक प्रमाण पत्रों का उपयोग नहीं कर पा रहे थे, लेकिन अब उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता मिलने के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी।

मानकों को पूरा करना होगा

उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता के लिए मदरसों को तय मानकों पर खरा उतरना होगा। विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर शिक्षा देने वाले मदरसों को प्राथमिक शिक्षा के मानक पूरे करने होंगे, जबकि माध्यमिक शिक्षा के लिए अलग मानक निर्धारित किए गए हैं।

दोपहर तक बोर्ड का पाठ्यक्रम

प्रदेश के मदरसों में अब दोपहर तक उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इसके बाद छात्र धार्मिक शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा तय किया जाएगा।

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